॥ आरती श्री शनि देव जी की ॥
जय जय श्री शनि देव,
जय जय श्री शनि देव ।
भक्तों के संकट हरते,
दासों के तुम सेव ॥
कृष्ण अमावस्या जन्मे,
रवि से असुरभाव ।
कृष्ण पक्ष में वार-पुनर्वा,
माना तुमको नाव ॥
श्याम अंग रौद्र रूप धर,
धारण करिया है ध्यान ।
तेरे नयन में अग्नि-सी,
तेरे मन में ज्ञान ॥
न्याय करन को नाम तिहारो,
सब पर करियो दया ।
दुखियों के तुम राखनहारे,
सबकी सुनियो प्रार्थना ॥
जो कोई श्रद्धा से,
तुम्हारी आरती गावे ।
संकट दूर करो उसकी,
कृपा तुम्हारी पावे ॥
जय जय श्री शनि देव,
जय जय श्री शनि देव ।

शनि देव का महत्व
शनि देव हमारे जीवन में न्याय और सत्य का प्रतीक हैं। हर शनिवार को उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करना विशेष महत्व रखता है। शनि देव की आरती, जो उनकी महिमा का गुणगान करती है, हमें उनके आशीर्वादों से लाभान्वित होने की अनुमति देती है। आरती करने से मानसिक शांति और स्थिरता मिलती है।
आरती का महत्व
शनि देव की आरती, धार्मिक परंपराओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे समय-समय पर गाने से भक्तों के हृदय में श्रद्धा बढ़ती है। आरती, भक्त और भगवान के बीच एक सशक्त संवाद स्थापित करती है। यह न केवल हमें आत्मिक शांति प्रदान करती है, बल्कि हमारे कार्यों में सफलता के लिए भी मार्ग प्रशस्त करती है।
rabindranathtagore.space , apjabdulkalam.online , jawaharlalnehru.online , chandrashekharazad.online , subhaschandrabose.space
शनि देव की आरती कैसे करें?
आरती करने के लिए पहले शनि देव की तस्वीर के सामने दिया जलाएं। फिर, एक बर्तन में फूल और धूप रखें। इसके बाद, समर्पण भाव से शनि देव की आरती पढ़ें। आरती का पाठ करते समय ‘शनि देव की आरती’ का उच्चारण ध्यानपूर्वक करें। इस प्रकार, आपकी आरती अधिक फलदायी होती है।
